हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) आज के समय में एक बहुत आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। इसे अक्सर "साइलेंट किलर" (खामोश हत्यारा) कहा जाता है क्योंकि शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन यह धीरे-धीरे धमनियों और दिल को नुकसान पहुँचाता रहता है।
एक वयस्क व्यक्ति का सामान्य रक्तचाप 120/80 mmHg माना जाता है। यदि आपका बीपी लगातार 140/90 mmHg या उससे अधिक रहता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर के मुख्य लक्षण
अक्सर लक्षण तब दिखते हैं जब बीपी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इन संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें:
- सिर के पिछले हिस्से में लगातार भारीपन या तेज सिरदर्द
- जल्दी थकान होना और चक्कर आना
- आंखों के आगे धुंधलापन दिखाई देना
- सांस फूलना या सीने में घबराहट महसूस होना
- बिना किसी कारण नाक से खून आना
- रात में ठीक से नींद न आना और बेचैनी
हाई बीपी होने के मुख्य कारण
- अधिक नमक का सेवन: भोजन में सोडियम की अधिक मात्रा रक्तचाप बढ़ाती है।
- तनाव और चिंता: लगातार मानसिक तनाव रहने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं।
- शारीरिक निष्क्रियता: दिनभर बैठे रहना और व्यायाम की कमी।
- मोटापा और वजन बढ़ना: अधिक वजन दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
- धूम्रपान और शराब: तंबाकू और शराब धमनियों की दीवार को कठोर बनाते हैं।
- आनुवंशिक कारण: यदि परिवार में माता-पिता को हाई बीपी रहा हो।
ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने के 5 आसान उपाय
1. नमक की मात्रा सीमित करें
दिन भर में एक छोटा चम्मच (5 ग्राम) से कम नमक का इस्तेमाल करें। डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, पापड़, अचार और नमकीन में छिपा हुआ नमक बहुत ज्यादा होता है, इनसे बचें।
2. नियमित रूप से टहलें
रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज गति से पैदल चलना (Brisk Walk) दिल को मजबूत बनाता है और बीपी को 5-8 अंक तक कम करने में मदद करता है।
3. पोटेशियम युक्त आहार लें
केला, नारियल पानी, हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर और दालों में पोटेशियम भरपूर होता है जो शरीर में सोडियम के प्रभाव को कम करता है।
4. बीपी की नियमित जांच कराएं
महीने में कम से कम 1-2 बार डिजिटल बीपी मॉनिटर से अपना ब्लड प्रेशर मापें और एक डायरी में नोट करें।
5. बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें
यदि डॉक्टर ने आपको बीपी की दवा लिखी है, तो बीपी सामान्य आने पर भी दवा खुद से बंद न करें। यह दवा लेने के कारण ही नियंत्रित है।
फार्मेसी की सलाह
हाई बीपी के मरीज़ों को साल में एक बार ईसीजी (ECG), किडनी फंक्शन और लिपिड प्रोफाइल की जांच डॉक्टर से परामर्श करके जरूर करानी चाहिए। हमारे यहाँ विश्वसनीय डिजिटल बीपी मॉनिटर एवं बीपी जांच मार्गदर्शन उपलब्ध है।
